भारतीय रिजर्व बैंक ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर चिंता जताई है, जिससे आर्थिक वृद्धि, मूल्य स्तर और आपूर्ति व्यवस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है।
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- अप्रैल 6 से 8 के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सभी सदस्यों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
- भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव और मूल्य स्तर पर दबाव बढ़ सकता है।
- इस संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और व्यापार मार्गों पर असर पड़ा है, जिससे आयात लागत, मुद्रा स्थिरता और समग्र आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।
- 7 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित युद्धविराम से अस्थायी राहत मिली, जिसके बाद समिति ने 8 अप्रैल को नीतिगत स्थिति यथावत रखने का निर्णय लिया।
- ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका प्रभाव उद्योगों और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर पड़ता है।
- मौद्रिक नीति समिति वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रही है, क्योंकि लंबे समय तक अस्थिरता से आपूर्ति व्यवस्था और आर्थिक सुधार प्रभावित हो सकते हैं।
- इस प्रकार के बाहरी झटके वित्तीय बाजारों में अस्थिरता उत्पन्न करते हैं, जिससे निवेश, विनिमय दर और आर्थिक संतुलन पर प्रभाव पड़ता है।
- केंद्रीय बैंक सावधानीपूर्वक नीति संतुलन बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि दोनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।





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