केंद्र शासित प्रदेश भारत के ऐसे क्षेत्र हैं जो सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में होते हैं और प्रशासनिक, रणनीतिक व सांस्कृतिक कारणों से बनाए गए हैं।
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- केंद्र शासित प्रदेशों का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 239 से 241 के तहत है, जहां राष्ट्रपति अपने प्रतिनिधि के रूप में प्रशासक या उपराज्यपाल के माध्यम से शासन चलाते हैं।
- इनकी अवधारणा 1874 में ब्रिटिश काल के Scheduled Districts से शुरू हुई, जो बाद में Chief Commissioner’s Provinces बने और स्वतंत्रता के बाद Part C और D राज्यों में वर्गीकृत हुए।
- States Reorganisation Act, 1956 और 7वें संविधान संशोधन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का पुनर्गठन किया गया, जिससे कई क्षेत्रों को राज्य का दर्जा मिला।
- केंद्र शासित प्रदेशों का निर्माण रणनीतिक महत्व, प्रशासनिक सुविधा, सांस्कृतिक विशिष्टता और पिछड़े व जनजातीय क्षेत्रों के संरक्षण के लिए किया गया।
- दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में विधान सभा और मंत्रिपरिषद होती है, जबकि अन्य सीधे केंद्र द्वारा संचालित होते हैं।
- संसद को केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सभी विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है, जिसमें राज्य सूची के विषय भी शामिल हैं।
- राष्ट्रपति कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विशेष नियम बना सकते हैं, जैसे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप, जिनका प्रभाव संसद के कानून के समान होता है।
- दिल्ली को Article 239AA के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है, जहां सीमित विधायी शक्तियां दी गई हैं, जबकि पुलिस, भूमि और कानून व्यवस्था केंद्र के अधीन हैं।
- गृह मंत्रालय केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन का मुख्य निकाय है, जिसे सलाह देने के लिए विभिन्न सलाहकार समितियां कार्य करती हैं।
- हाल के बदलावों में 2019 में जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन और 2020 में दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का विलय शामिल है।





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