1945 में बने संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य था एकतरफा प्रभुत्व रोकना। लेकिन 2025 में अमेरिका–चीन प्रतिद्वंद्विता और बहुध्रुवीयता ने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। भारत और ब्राज़ील जैसे मध्यम शक्तियाँ भी भूमिका मांग रही हैं। शांति मिशन और सहायता अभी भी ज़रूरी हैं, पर सुधार न होने पर UN अप्रासंगिक हो सकता है।
BulletsIn
- 2025 में UN के 80 साल, अस्तित्व पर संकट
- अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा, बहुध्रुवीयता बढ़ी
- भारत, ब्राज़ील, EU जैसी मध्यम शक्तियाँ सक्रिय
- शांति मिशन ज़रूरी, पर संसाधन की कमी
- 30.5 करोड़ लोग अभी भी UN सहायता पर निर्भर
- गाज़ा, सूडान में मानवीय संकट उदाहरण
- ट्रंप की नीतियाँ बहुपक्षवाद को कमजोर कर रहीं
- चीन सतर्क, पर वैश्विक नेतृत्व की चाह बरकरार
- WTO, UN वार्ता ठप, सुधार ही समाधान
- UNSC विस्तार से मिलेगी वैधता और संतुलन





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