लद्दाख के 2,200 से अधिक ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, पर्यटन का उभार और सैनिक गतिविधियाँ इस संकट को बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोग जल संकट, भूजल गिरावट और असुरक्षित भविष्य का सामना कर रहे हैं।
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- लद्दाख में 2,200+ ग्लेशियर, 7,900 वर्ग किमी क्षेत्र
- लिटिल आइस एज से अब तक 40% ग्लेशियर क्षेत्र गायब
- सिंधु बेसिन का 40% पानी ग्लेशियर पिघलन से
- जनसंख्या 15% सालाना दर से बढ़ रही
- हर साल 115+ बोरवेल, 70 लाख घन मीटर जल निकासी
- दशकों में भूजल उपयोग 26 गुना बढ़ा
- कोविड के बाद पर्यटन बूम → होटल, एसी, पानी की मांग
- पर्यटक स्थानीयों से ज्यादा पानी खर्च करते
- गलवान झड़प के बाद सैनिक बेस से उत्सर्जन बढ़ा
- कार्बन धूल से ग्लेशियर पिघलन तेज
- समय से पहले पिघलन, सिंचाई से पहले पानी बर्बाद
- खेती, सिंचाई और पेयजल पर गहरा असर





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