भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पूरे देश में विशेष POCSO अदालतें जल्द स्थापित करने का आदेश दिया है। यह निर्देश बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराध और मुकदमों में देरी को देखते हुए दिया गया। अदालत ने कहा कि न्याय में देरी बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है।
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- सुप्रीम कोर्ट ने विशेष POCSO अदालतों की त्वरित स्थापना का आदेश दिया
- बच्चों से दुष्कर्म के मामलों और ट्रायल में देरी पर स्वतः संज्ञान लिया
- जिन जिलों में 100+ FIR या 300+ लंबित केस, वहां कोर्ट अनिवार्य
- 300 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में दो विशेष अदालतें चाहिए
- POCSO कानून के अनुसार ट्रायल एक साल में पूरा होना चाहिए
- समय पर चार्जशीट, जांच प्रक्रिया में संवेदनशीलता पर जोर
- 2019 का आदेश दोहराया, मतलब सिर्फ विशेष POCSO अदालतें
- बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, यूपी, ओडिशा, बंगाल में कमी पाई गई
- कुछ राज्यों ने पहले केंद्र सरकार की सहायता से अदालतें बनाई थीं
- बच्चों को शीघ्र न्याय, मानसिक आघात से राहत व अंतरराष्ट्रीय संधियों के अनुरूप कदम





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