Supreme Court of India ने स्पष्ट किया कि Article 200 के तहत यदि राज्यपाल किसी विधेयक को मंजूरी देने में देरी करता है या अस्वीकार करता है, तो उसे राज्य को कारण बताना होगा। यह फैसला Tamil Nadu से जुड़े मामले में दिया गया।
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- तमिलनाडु सरकार ने राज्यपाल द्वारा कई विधेयकों को लंबित रखने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
- राज्य का कहना था कि इससे प्रशासनिक कार्य और जनहित प्रभावित हो रहे हैं।
- अनुच्छेद 200 राज्यपाल की शक्तियों को परिभाषित करता है जो विधेयकों पर निर्णय से जुड़ी हैं।
- राज्यपाल विधेयक को मंजूरी दे सकता है, रोक सकता है या अन्य कार्रवाई कर सकता है।
- यदि राज्यपाल मंजूरी में देरी या इनकार करता है, तो उसे कारण बताना अनिवार्य है।
- सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया।
- राज्यपाल की शक्तियाँ संविधान की सीमाओं के भीतर ही प्रयोग की जानी चाहिए।
- राज्यपाल विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेज सकता है।
- कुछ मामलों में विधेयक को राष्ट्रपति के पास भी भेजा जा सकता है।
- राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ संविधान से ऊपर नहीं हो सकतीं।
- न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल को संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत कार्य करना चाहिए।
- तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि देरी से राज्य की नीतियों और कार्यों में बाधा आती है।





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