श्री अरविंद घोष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारी नेता, राष्ट्रवादी विचारक, दार्शनिक, कवि और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने राजनीति और अध्यात्म दोनों क्षेत्रों में गहरा प्रभाव छोड़ा।
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- Sri Aurobindo Ghosh का जन्म 15 अगस्त 1872 को कोलकाता में हुआ था और वे आधुनिक भारत के महान राष्ट्रवादी, दार्शनिक तथा आध्यात्मिक विचारकों में गिने जाते हैं।
- इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे 1893 में भारत लौटे और बड़ौदा राज्य में कार्य करते हुए राष्ट्रीय आंदोलन तथा स्वतंत्रता के विचारों से जुड़े।
- 1905 के बंग-भंग के बाद उन्होंने स्वदेशी आंदोलन को समर्थन दिया और अनुशीलन समिति जैसे क्रांतिकारी संगठनों को वैचारिक प्रेरणा प्रदान की।
- उन्होंने Bande Mataram, Karmayogin और Yugantar जैसे पत्रों के माध्यम से स्वराज, राष्ट्रीय चेतना और ब्रिटिश शासन के विरोध का व्यापक प्रचार किया।
- 1908 के अलीपुर बम कांड में उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन एक वर्ष बाद वे बरी हो गए और इसके बाद उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ गया।
- 1910 में वे पुडुचेरी चले गए, जहां उन्होंने इंटीग्रल योग का दर्शन विकसित किया और 1926 में श्री अरविंद आश्रम की स्थापना की।
- उनकी प्रमुख रचनाओं में The Life Divine, The Synthesis of Yoga और Savitri शामिल हैं, जो आध्यात्मिक दर्शन और मानव चेतना के विकास पर आधारित हैं।
- अपने प्रसिद्ध “पांच स्वप्न” संदेश में उन्होंने स्वतंत्र एवं अखंड भारत, एशिया के पुनर्जागरण, विश्व एकता, भारत की आध्यात्मिक भूमिका और उच्चतर मानव चेतना की कल्पना प्रस्तुत की।





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