हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा से विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण कर भारत की पहली निजी कक्षीय रॉकेट उड़ान का नया इतिहास रचते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
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- स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण कर निजी क्षेत्र की पहली कक्षीय रॉकेट उड़ान का महत्वपूर्ण प्रयास किया।
- मिशन आगमन के अंतर्गत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रथम प्रक्षेपण परिसर से उड़ान भरने के बाद रॉकेट ने सुरक्षित रूप से प्रक्षेपण टावर को पार किया।
- भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के अग्रणी वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के नाम पर विकसित चार चरणों वाला विक्रम-1 छोटे उपग्रहों के लिए त्वरित प्रक्षेपण सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु तैयार किया गया है।
- लगभग सात मंजिला ऊंचाई वाला यह प्रक्षेपण यान 450 किलोमीटर ऊंची निम्न पृथ्वी कक्षा तक पहुंचने के लक्ष्य के साथ प्रक्षेपित किया गया है।
- मिशन के सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचने पर भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जहां निजी कंपनियां स्वतंत्र रूप से कक्षीय प्रक्षेपण क्षमता प्रदर्शित कर चुकी हैं।
- स्काईरूट एयरोस्पेस का लक्ष्य उपग्रह प्रक्षेपण के लिए मांग आधारित सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे व्यावसायिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण को अधिक सरल और सुलभ बनाया जा सके।
- यह मिशन 2022 में प्रक्षेपित विक्रम-एस उपकक्षीय मिशन की सफलता के बाद निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष यात्रा का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए नवाचार, उद्यमिता और निजी भागीदारी को अंतरिक्ष क्षेत्र की नई शक्ति बताया।





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