पाकिस्तान इस समय राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और वैशिक गठबंधनों के बदलाव के दौर में है। इन हालातों का सीधा असर दक्षिण एशिया की स्थिरता और भारत की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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- पाकिस्तान में राजनीतिक अनिश्चितता, आर्थिक मंदी और शासन संबंधी दबाव बढ़ रहे हैं।
- महंगाई, मुद्रा अस्थिरता और विदेशी मुद्रा की कमी से जनता का भरोसा कमजोर।
- नागरिक–सैन्य तनाव के कारण नीतिगत निर्णयों में रुकावट और सुधार धीमे।
- चीन के साथ CPEC परियोजनाएँ पाकिस्तान की रणनीतिक और आर्थिक दिशा बदल रही हैं।
- अमेरिका का जुड़ाव सीमित, पर पाकिस्तान अब भी इंडो-पैसिफिक रणनीति में प्रासंगिक।
- गल्फ देशों (सऊदी अरब, यूएई, ईरान) से पाकिस्तान के आर्थिक और ऊर्जा संबंध अहम।
- परमाणु क्षमता पाकिस्तान की सुरक्षा नीति का मूल हिस्सा; वैशिक समुदाय सतर्क।
- भारत के लिए पश्चिमी सीमाओं पर सतर्कता और निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता।
- पाकिस्तान की अस्थिरता में गैर-राज्य तत्वों की गतिविधि बढ़ने का खतरा, भारत को आतंकवाद-रोधी और साइबर सुरक्षा मज़बूत करनी होगी।
- भारत को रणनीतिक साझेदारी, AI-आधारित रक्षा, सुरक्षित व्यापार मार्ग और सप्लाई चेन लचीलापन पर ध्यान देना चाहिए।





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