लॉर्ड कर्जन जीवनी सुधार और बंगाल विभाजन यूपीएससी नोट्स | BulletsIn
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लॉर्ड कर्जन 1899 से 1905 तक भारत के वायसराय रहे, जो अपने प्रशासनिक सुधारों, विदेश नीति और 1905 के बंगाल विभाजन के कारण भारतीय राष्ट्रवाद पर गहरा प्रभाव डालने के लिए जाने जाते हैं।
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लॉर्ड कर्जन 1899 से 1905 तक भारत के वायसराय रहे और उन्होंने ब्रिटिश शासन में केंद्रीकृत और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था को बढ़ावा दिया।
उन्होंने पुलिस, शिक्षा, कृषि और बुनियादी ढांचे में सुधार करके प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए।
उनकी विदेश नीति का उद्देश्य एशिया में ब्रिटिश प्रभाव को मजबूत करना था, विशेष रूप से फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और उत्तर-पश्चिम सीमा क्षेत्रों में।
उन्होंने 1904 का भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम लागू किया, जिससे उच्च शिक्षा संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ गया और राष्ट्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने का प्रयास हुआ।
1904 में प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम लागू किया गया, जिससे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को बढ़ावा मिला।
उनका सबसे विवादित निर्णय 1905 का बंगाल विभाजन था, जिसे प्रशासनिक कारणों से किया गया लेकिन इससे व्यापक विरोध और स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ।
1911 में भारी विरोध के बाद यह विभाजन रद्द कर दिया गया और यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को तेज करने वाला महत्वपूर्ण घटना बनी।
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