कोई धर्म पशु क्रूरता या प्रदूषण की अनुमति नहीं देता: न्यायमूर्ति अभय ओका — न्यायाधीशों को पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी बनना चाहिए*
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित व्याख्यान “क्लीन एयर, क्लाइमेट जस्टिस एंड वी – टुगेदर फॉर अ सस्टेनेबल फ्यूचर” में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय एस. ओका ने कहा कि कोई भी धर्म पर्यावरण या जीवों को हानि पहुँचाने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों और नागरिकों दोनों का संवैधानिक दायित्व है कि वे पर्यावरण की रक्षा करें और धार्मिक आड़ में होने वाले प्रदूषण को रोकें।
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• न्यायमूर्ति ओका बोले – कोई धर्म पशु क्रूरता या पर्यावरण विनाश की अनुमति नहीं देता।
• न्यायपालिका से कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण में उदाहरण प्रस्तुत करें।
• अनुच्छेद 51A के तहत नागरिक और राज्य दोनों अपने कर्तव्य में असफल रहे।
• पटाखे, लाउडस्पीकर और मूर्ति विसर्जन को गैर-आवश्यक धार्मिक प्रथा बताया।
• कहा पटाखे फोड़ना किसी धर्म का हिस्सा नहीं, यह बुज़ुर्गों, पक्षियों व जानवरों को नुकसान पहुँचाता है।
• मूर्ति विसर्जन से जल प्रदूषण पर चिंता जताई, कृत्रिम तालाबों का समर्थन किया।
• कहा लाउडस्पीकर या अज़ान की तेज़ आवाज़ भी धार्मिक रूप से आवश्यक नहीं।
• न्यायाधीशों से कहा कि वे धार्मिक या जनभावनाओं के दबाव में न आएँ।
• प्रदूषण फैलाने वाली धार्मिक परंपराओं में वैज्ञानिक सुधार की आवश्यकता बताई।
• पर्यावरण कानूनों में सजा कम कर केवल जुर्माना लगाने के संशोधन का विरोध किया।





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