खगोलविदों ने L 98-59 d नाम के एक ऐसे एक्सोप्लैनेट की पहचान की है, जो ग्रहों की एक नई श्रेणी का हिस्सा हो सकता है। पृथ्वी से 35 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित इस ग्रह के भीतर लंबे समय तक रहने वाला मैग्मा महासागर और गैसों से जुड़ी असामान्य संरचना होने की संभावना जताई गई है।
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- L 98-59 d पृथ्वी से लगभग 35 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक एक्सोप्लैनेट है, जिसे वैज्ञानिक अब ग्रहों की संभावित नई श्रेणी के रूप में देख रहे हैं।
यह ग्रह आकार में पृथ्वी से थोड़ा बड़ा है, लेकिन इसकी घनत्व काफी कम है, जिससे संकेत मिलता है कि यह सामान्य चट्टानी ग्रहों जैसा नहीं है। - अध्ययन के अनुसार इस ग्रह की सतह के नीचे लंबे समय तक मौजूद रहने वाला पिघले हुए पत्थरों यानी मैग्मा का महासागर हो सकता है।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मैग्मा परत हाइड्रोजन जैसी गैसों को अपने भीतर फंसा सकती है और बहुत लंबे समय तक धीरे-धीरे बाहर छोड़ सकती है।
- इसी वजह से L 98-59 d को न पूरी तरह गैस ग्रह माना जा रहा है और न ही सामान्य ठोस ग्रह, जिससे यह बेहद अलग और खास बनता है।
- यह खोज वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकती है कि हमारे सौरमंडल के बाहर ग्रह कैसे बनते हैं, कैसे विकसित होते हैं और उनका वातावरण कैसे बना रहता है।
- शोधकर्ताओं का मानना है कि यह ग्रह उन दुनियाओं का उदाहरण हो सकता है जो अब तक ज्ञात ग्रह श्रेणियों के बीच की कड़ी साबित हों।
- इस खोज से जुड़ी जानकारी Nature पत्रिका में प्रकाशित हालिया अध्ययन में दी गई है, जिससे इसे वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





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