भारत ने जैव विविधता सम्मेलन के तहत नागोया प्रोटोकॉल पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट 27 फरवरी 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी के सहयोग से प्रस्तुत की। यह कदम प्रोटोकॉल के अनुच्छेद 29 के तहत निगरानी और रिपोर्टिंग संबंधी दायित्व का हिस्सा है।
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- भारत ने नागोया प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
- यह रिपोर्ट 27 फरवरी 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी के साथ मिलकर सौंपी।
- रिपोर्ट जमा करना नागोया प्रोटोकॉल के अनुच्छेद 29 के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी का हिस्सा है, जो मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग से जुड़ा है।
- नागोया प्रोटोकॉल, जैव विविधता सम्मेलन के अंतर्गत एक पूरक समझौता है, जो आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और उनसे होने वाले लाभों के न्यायसंगत बंटवारे पर केंद्रित है।
- इसका महत्व इसलिए है क्योंकि यह जैव विविधता से समृद्ध देशों के संसाधनों के शोषण को रोकने और स्थानीय समुदायों को लाभ दिलाने की व्यवस्था देता है।
- भारत की यह रिपोर्ट देश के जैव विविधता संरक्षण से जुड़े कानूनी और संस्थागत ढाँचे को भी सामने लाती है, खासकर एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग व्यवस्था के संदर्भ में।
- UPSC के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि नागोया प्रोटोकॉल और जैव विविधता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते परीक्षा में पहले भी पूछे जा चुके हैं।
- हालिया रिपोर्ट के कारण यह विषय करंट अफेयर्स, पर्यावरण शासन और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के संदर्भ में और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।





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