यह घोषणा कालिंजर क्षेत्र की दुर्लभ भूवैज्ञानिक विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व को उजागर करती है, जिससे इसे एक प्रमुख पर्यटन और अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
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- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित कालिंजर पहाड़ी को 16 मार्च 2026 को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा राष्ट्रीय भू धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
- यह क्षेत्र विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है और कालिंजर, खजुराहो तथा चित्रकूट को जोड़ने वाले पर्यटन मार्ग का प्रमुख आकर्षण बनने की संभावना है।
- यह स्थल एपार्कियन असंगति नामक दुर्लभ भूवैज्ञानिक संरचना के लिए जाना जाता है, जहां विभिन्न कालों की चट्टानें एक साथ मिलती हैं।
- लगभग 2.5 अरब वर्ष पुराने बुंदेलखंड ग्रेनाइट के ऊपर करीब 1.2 अरब वर्ष पुराने कैमूर बलुआ पत्थर स्थित हैं, जो पृथ्वी के प्राचीन इतिहास को दर्शाते हैं।
- इस क्षेत्र की भू संरचना ने कालिंजर किले की सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि ऊंचा पथरीला भूभाग प्राकृतिक रक्षा प्रदान करता था।
- किले के निर्माण में स्थानीय पत्थरों का उपयोग किया गया, जो भूविज्ञान और ऐतिहासिक स्थापत्य के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।
- कालिंजर किला धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है, जो भगवान शिव और समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा हुआ है।
- इस स्थल का उल्लेख बौद्ध ग्रंथों में मिलता है और यह चेदि, मौर्य तथा गुप्त जैसे कई राजवंशों के अधीन रहा, जिससे इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत स्पष्ट होती है।





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