कर्नाटक के लक्कुंडी में आधुनिक तकनीक से कल्याण चालुक्य कालीन संरचनाओं की खोज और ऐतिहासिक विरासत के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण का व्यापक अभियान शुरू हुआ।
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- गडग जिले के लक्कुंडी में पुरातत्व विभाग और उन्नत अध्ययन राष्ट्रीय संस्थान के सहयोग से छह महीने का सर्वेक्षण चल रहा है।
- प्रकाश पहचान दूरी मापन तकनीक से भूमि की सूक्ष्म संरचनाओं का मानचित्रण कर भूमिगत प्राचीन संरचनाओं की पहचान की जाएगी।
- भौगोलिक सूचना प्रणाली, दूरसंवेदी तकनीक और भूभेदी रडार बिना खुदाई के दबी दीवारों तथा पुरातात्विक अवशेषों की पहचान में सहायता करेंगे।
- लक्कुंडी पश्चिमी चालुक्य कालीन मंदिरों, बावड़ियों और अभिलेखों के लिए प्रसिद्ध है तथा स्थानीय परंपरा में 101 कुओं और 101 मंदिरों का उल्लेख मिलता है।
- 2023 से लक्कुंडी में 70 स्मारकों की पहचान हुई है, जिनमें 32 मंदिर, 28 कुएं और सात अन्य संरचनाएं शामिल हैं।
पुरातात्विक खुदाई के पहले चरण में 1,500 से अधिक तथा दूसरे चरण में 1,800 से अधिक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं। - कर्नाटक सरकार ने 44 विरासत स्थलों को राज्य संरक्षण देने और 5,000 से अधिक पुरावशेषों के लिए खुला संग्रहालय विकसित करने की योजना बनाई है।
- कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर से नवपाषाण कालीन पत्थर की कुल्हाड़ी और धूसर मिट्टी के बर्तन मिले, जिससे लक्कुंडी का इतिहास मध्यकाल से भी पुराना साबित होता है।





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