1919 में शुरू हुआ खिलाफ़त आंदोलन भारत में उस समय आरंभ हुआ जब विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश नीतियों के कारण ओटोमन ख़िलाफ़त को समाप्त किया जा रहा था। यह आंदोलन शीघ्र ही गांधी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर अंग्रेज़ों के खिलाफ़ एक विशाल संयुक्त संघर्ष बन गया।
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* आंदोलन की शुरुआत ओटोमन ख़िलाफ़त को बचाने के उद्देश्य से हुई।
* नेतृत्व अली बंधुओं, मौलाना आज़ाद, हकीम अजमल खान, हसरत मोहानी ने किया; गांधी व कांग्रेस का समर्थन मिला।
* रॉलेट एक्ट, जालियांवाला बाग़ और पंजाब में दमन से जन आक्रोश बढ़ा।
* खिलाफ़त और असहयोग का एकीकरण हुआ, हिंदू–मुस्लिम एकता का अनोखा दृश्य बना।
* छात्र, किसान, महिलाएं, व्यापारी और श्रमिक बड़ी संख्या में जुड़े।
* सरकार ने खिलाफ़त व कांग्रेस संगठनों को अवैध घोषित किया; अधिकांश नेता गिरफ्तार हुए।
* अफ़गानिस्तान हिजरत प्रयास और मोपला विद्रोह से आंदोलन कमजोर पड़ा।
* चौरी-चौरा हिंसा के बाद गांधी ने असहयोग आंदोलन अचानक वापस ले लिया।
* 1924 में ओटोमन ख़िलाफ़त समाप्त होने से आंदोलन औपचारिक रूप से खत्म हुआ।
* आंदोलन ने आज़ादी की लड़ाई में राजनीतिक चेतना, सामूहिक एकता व व्यापक जनजागरण को मज़बूत किया।





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