आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने कहा है कि 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था “थोड़ी कमजोर” हो सकती है, हालांकि वैश्विक विकास स्थिर रहेगा। उन्होंने अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं का भी जिक्र किया, जो वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती हैं।
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* आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था के कमजोर रहने की संभावना जताई, लेकिन इसके बारे में और विवरण वर्ल्ड इकनॉमी आउटलुक अपडेट में मिलेगा।
* उन्होंने 2025 में वैश्विक विकास को स्थिर बताया, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में असमानताएं देखने को मिल सकती हैं, और भारत की अर्थव्यवस्था में हल्की गिरावट हो सकती है।
* जॉर्जिवा ने इसके कारणों की विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को प्रमुख कारण बताया।
* इसके विपरीत, अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर रही है, जबकि यूरोपीय संघ में विकास धीमा पड़ा है।
* चीन में मुद्रास्फीति संबंधी दबाव और घरेलू मांग में कमी जारी है, जो उसकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
* कम आय वाले देशों को नई आर्थिक झटकों का सामना करने में कठिनाई हो सकती है।
* जॉर्जिवा ने अमेरिकी व्यापार नीतियों, विशेष रूप से टैरिफ, कर, रेगुलेशन में ढील और सरकारी कार्यप्रणाली को लेकर अनिश्चितता जताई।
* वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में यह अनिश्चितता दीर्घकालिक ब्याज दरों के बढ़ने का कारण बन रही है।
* आईएमएफ ने 2024-25 में भारत की जीडीपी 6.4% बढ़ने का अनुमान जताया है, जो पिछले वर्ष की 8.2% की वृद्धि से कम है।
* भारत का नाममात्र सकल मूल्य वर्धित (GVA) 2025 में 9.3% बढ़ने का अनुमान है, जो 2024 में 8.5% की वृद्धि से अधिक है।





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