भारत और यूनाइटेड किंगडम के व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते ने व्यापार को नई गति दी है, लेकिन निवेश संरक्षण, औषधि पेटेंट और कार्बन सीमा कर जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अभी आगे बातचीत होनी शेष है।
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- भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया, जिसके तहत भारत के 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त कर व्यापार और पेशेवर गतिशीलता को बढ़ावा दिया गया।
- समझौते में द्विपक्षीय निवेश संधि शामिल नहीं की गई है, जिसके कारण निवेश संरक्षण तथा निवेश विवादों के समाधान से जुड़े प्रावधानों पर आगे अलग से वार्ता होगी।
- भारत ने पेटेंट अधिनियम 1970 की धारा 3(घ) को यथावत रखते हुए औषधि क्षेत्र में अधिक कठोर बौद्धिक संपदा प्रावधानों को स्वीकार नहीं किया।
- इस व्यवस्था के कारण भारतीय औषधि उद्योग को किफायती जेनेरिक दवाओं का उत्पादन जारी रखने में सहायता मिलेगी तथा घरेलू औषधि निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनी रहेगी।
- समझौते में यूनाइटेड किंगडम की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था को शामिल नहीं किया गया है, जो 1 जनवरी 2027 से इस्पात, एल्यूमिनियम और सीमेंट जैसे उत्पादों पर लागू होगी।
- इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को अतिरिक्त कार्बन शुल्क का सामना करना पड़ सकता है, जिससे व्यापार समझौते से मिलने वाले कुछ लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की वार्ताओं में निवेश संरक्षण, विवाद निपटान व्यवस्था, जलवायु आधारित व्यापार नियमों और नियामकीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- यह समझौता भारत और यूनाइटेड किंगडम के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देता है, जबकि शेष जटिल विषयों पर आगे की बातचीत दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।





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