प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान भारत और यूएई ने रणनीतिक तेल भंडारण, एलपीजी आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर महत्वपूर्ण समझौते किए।
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- भारत और यूएई ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आपातकालीन कच्चे तेल उपलब्धता मजबूत करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- प्रस्तावित समझौते के तहत एडीएनओसी भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व केंद्रों में लगभग 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल संग्रहित कर सकता है।
- भंडारण सहयोग में विशाखापट्टनम स्थित रणनीतिक रिजर्व सुविधा, ओडिशा के चांदीखोल में प्रस्तावित अवसंरचना और फुजैराह में संभावित पारस्परिक व्यवस्था शामिल है।
- रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व देशों को युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति बाधाओं और वैश्विक तेल मूल्य अस्थिरता जैसी परिस्थितियों से निपटने में सहायता करते हैं।
- एडीएनओसी की भागीदारी भारत की ऊर्जा आपूर्ति विविधीकरण रणनीति को मजबूत करने और यूएई के साथ दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- भारत और यूएई ने घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक जरूरतों को समर्थन देने के लिए दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।
- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच इस साझेदारी का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा साझेदारियां भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनती हैं।





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