भारत के वित्त मंत्रालय ने जलवायु वित्त के लिए एक मसौदा वर्गीकरण ढांचा जारी किया है। यह 2024 के केंद्रीय बजट में घोषित पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि कौन सी परियोजनाएँ ‘हरित’ मानी जाएंगी और इससे जलवायु निवेश को दिशा व पारदर्शिता मिलेगी। जनता से सुझाव 25 जून 2025 तक मांगे गए हैं।
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- मसौदा दस्तावेज़ जलवायु से जुड़ी परियोजनाओं की स्पष्ट परिभाषा देता है
- मुख्य लक्ष्य: न्यूनीकरण, अनुकूलन और कठिन-घटाने योग्य क्षेत्रों का संक्रमण
- ऊर्जा, कृषि, परिवहन, भवन, जल, सीमेंट, स्टील जैसे क्षेत्रों को कवर करता है
- दो-स्तरीय तरीका: गुणात्मक सिद्धांत + मात्रात्मक प्रदर्शन लक्ष्य
- परियोजनाएं दो श्रेणियों में: जलवायु सहयोगी और संक्रमण सहयोगी
- जलवायु सहयोगी को दो स्तरों में बांटा गया है, उत्सर्जन घटाने के आधार पर
- हरा दिखाने के झूठे दावों (ग्रीनवॉशिंग) को रोकने की मंशा
- ASEAN मानकों से मेल खाता, समय के साथ अपडेट होगा
- 25 जून 2025 तक सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए खुला
- भारत के 2030 जलवायु लक्ष्यों हेतु वित्त जुटाने की दिशा में अहम कदम





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