भारत सरकार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में 49% तक विदेशी निवेश की अनुमति देने पर विचार कर रही है। यह कदम कोयले की जगह स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में है। प्रस्तावित संशोधन जुलाई 2025 संसद सत्र में पेश हो सकते हैं।
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- परमाणु क्षेत्र में 49% विदेशी हिस्सेदारी की योजना
- कोयले की जगह स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की कोशिश
- अब तक सरकार का एकाधिकार रहा है इस क्षेत्र में
- निवेश को अभी भी सरकारी मंजूरी की जरूरत होगी
- जरूरी कानून संशोधन जुलाई 2025 में संसद में पेश होंगे
- ‘सिविल लाइबिलिटी’ और ‘एटॉमिक एनर्जी एक्ट’ में बदलाव प्रस्तावित
- निजी कंपनियों को परमाणु संयंत्र बनाने, चलाने की अनुमति मिल सकती है
- वेस्टिंगहाउस, GE, EDF, रोसाटॉम जैसी कंपनियां रुचि दिखा चुकीं
- रिलायंस, टाटा, अदानी, वेदांता $26 बिलियन निवेश को तैयार
- लक्ष्य: 2047 तक परमाणु क्षमता 12 गुना बढ़ाकर 100 GW करना





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