भारत ने उच्च समुद्री मत्स्यन के लिए प्राधिकरण पत्र व्यवस्था शुरू की है, जिसका उद्देश्य समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग बढ़ाना, मछुआरों की आय में वृद्धि करना तथा समुद्री निर्यात और नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
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- भारत ने प्राधिकरण पत्र व्यवस्था लागू की है, जिसके माध्यम से भारतीय मत्स्य नौकाओं को विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र तथा उससे आगे के समुद्री क्षेत्रों में सतत मत्स्यन की अनुमति दी जाएगी।
- इस पहल का उद्देश्य गहरे समुद्री मत्स्यन को बढ़ावा देना, तटीय मत्स्य संसाधनों पर दबाव कम करना, मछुआरों की आय बढ़ाना तथा वैश्विक समुद्री उत्पाद बाजार में भारत की भागीदारी मजबूत करना है।
- भारत के पास 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा तथा लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र है, जहां गहरे समुद्री मत्स्य संसाधनों की व्यापक संभावनाएं उपलब्ध हैं।
- नई व्यवस्था के अंतर्गत अनुमति प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे मत्स्य सहकारी समितियों तथा मत्स्य उत्पादक संगठनों को अधिक लाभ मिलेगा।
- यह कार्यक्रम उच्च मूल्य वाली समुद्री प्रजातियों के सतत दोहन, रोजगार सृजन, समुद्री संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा मत्स्य क्षेत्र के विविधीकरण को प्रोत्साहित करेगा।
- भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है तथा वैश्विक मत्स्य उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत योगदान देता है। इस क्षेत्र से लगभग 30 मिलियन लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
- पिछले वित्तीय वर्ष में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 73,000 करोड़ रुपये रहा और नई व्यवस्था से गुणवत्ता आधारित समुद्री निर्यात में और वृद्धि होने की संभावना है।
- इस अवसर पर ओडिशा गहरे समुद्री मत्स्यन मिशन 2026–2036 की भी घोषणा की गई, जिसके लिए 2,295.45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत गहरे समुद्री मत्स्यन अवसंरचना, आधुनिक मत्स्य बाजार, जल कृषि पार्क तथा निर्यातोन्मुख सुविधाओं का विकास किया जाएगा।





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