वर्ष 2026 में भारत के एलपीजी आयात ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां अमेरिका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा और पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
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- वर्ष 2026 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस आपूर्तिकर्ता बन गया और उसने पश्चिम एशियाई देशों को पीछे छोड़ दिया।
- द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन से बनी होती है तथा घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
- मई 2026 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55% से अधिक रही और लगभग 666,000 टन गैस की आपूर्ति की गई।
- फरवरी 2026 से पहले पश्चिम एशिया के देश भारत की एलपीजी खपत का लगभग 60% तथा कुल आयात का 90% तक योगदान करते थे।
- होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा चुनौतियों और आपूर्ति बाधाओं के कारण प्रमुख खाड़ी देशों से एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई।
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने नवंबर 2025 में अमेरिका के साथ एक वर्षीय समझौता किया।
- इस समझौते के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग 2.2 मिलियन टन एलपीजी आयात की व्यवस्था की गई, जो भारत की कुल आयात आवश्यकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- भारत ने ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण के लिए ईरान, ऑस्ट्रेलिया, रूस, अर्जेंटीना, कांगो, अंगोला, नाइजीरिया और कैमरून से भी एलपीजी आयात किया।





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