फिच रेटिंग्स के अनुसार वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत में महँगाई को बढ़ा सकती हैं और वित्तीय वर्ष दो हजार सत्ताईस की शुरुआत में आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकती हैं।
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• फिच रेटिंग्स के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं तो भारत में उपभोक्ता महँगाई दर अपेक्षा से अधिक बढ़ सकती है।
• महँगाई बढ़ने से परिवारों की क्रय शक्ति घट सकती है जिससे उपभोक्ता खर्च कम होगा और आर्थिक गतिविधियों की गति प्रभावित हो सकती है।
• अनुमान है कि वित्तीय वर्ष दो हजार छब्बीस में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग सात दशमलव पाँच प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।
• वित्तीय वर्ष दो हजार सत्ताईस में आर्थिक वृद्धि लगभग छह दशमलव सात प्रतिशत तक धीमी पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है।
• हाल के आँकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण खुदरा महँगाई दर में धीरे धीरे बढ़ोतरी देखी जा रही है।
• अनुमान है कि वर्ष दो हजार छब्बीस के अंत तक महँगाई दर लगभग चार दशमलव पाँच प्रतिशत के आसपास पहुँच सकती है।
• भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति दर को पाँच दशमलव पच्चीस प्रतिशत पर स्थिर रखते हुए तटस्थ नीति रुख बनाए रखा है।
• पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति में संभावित बाधाओं से वैश्विक तेल कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।





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