अठारहवीं शताब्दी में हुए कर्नाटक युद्ध भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ थे, जिनसे फ्रांसीसी प्रभाव कमजोर हुआ और ब्रिटिश शक्ति का उदय हुआ।
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• कर्नाटक युद्ध अठारहवीं शताब्दी के मध्य में दक्षिण भारत में ब्रिटिश और फ्रांसीसी व्यापारिक कंपनियों के बीच लड़े गए तीन प्रमुख संघर्ष थे।
• ये युद्ध यूरोप में चल रहे संघर्षों जैसे ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध और सात वर्षीय युद्ध से गहराई से जुड़े हुए थे।
• पहला कर्नाटक युद्ध सत्रह सौ छियालिस में आरंभ हुआ जब फ्रांसीसी सेनाओं ने मद्रास पर कब्जा कर लिया।
• दूसरे कर्नाटक युद्ध में हैदराबाद और कर्नाटक के उत्तराधिकार विवादों के दौरान दोनों यूरोपीय शक्तियों ने अलग अलग स्थानीय शासकों का समर्थन किया।
• ब्रिटिश सेनापति रॉबर्ट क्लाइव ने सत्रह सौ इक्यावन में आर्कोट पर कब्जा कर अपनी प्रसिद्धि बढ़ाई और फ्रांसीसी प्रभाव को कमजोर किया।
• सत्रह सौ सत्तावन में प्लासी के युद्ध के बाद ब्रिटिशों को बंगाल की अपार संपत्ति और संसाधनों पर नियंत्रण प्राप्त हुआ।
• तीसरा कर्नाटक युद्ध सत्रह सौ साठ में वांडीवाश के युद्ध के साथ समाप्त हुआ जिसमें ब्रिटिश सेनाओं ने फ्रांसीसी सेना को पराजित किया।
• सत्रह सौ तिरसठ की पेरिस संधि के बाद भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक महत्व समाप्त हो गया और ब्रिटेन प्रमुख औपनिवेशिक शक्ति बन गया।





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