ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के तहत स्थापित ग्राम न्यायालय (Gram Nyayalayas) का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सस्ता और त्वरित न्याय देना है। हालांकि सरकार का लक्ष्य 5000 न्यायालयों की स्थापना का था, वर्तमान में केवल लगभग 200 न्यायालय ही कार्यरत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में राज्यों को अधिनियम के प्रावधान लागू करने के निर्देश दिए थे। इन अदालतों का लक्ष्य न्याय को गाँव तक पहुँचाना और जिला न्यायालयों का बोझ घटाना है।
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- ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के तहत ग्रामीण स्तर पर अदालतों की स्थापना।
- लक्ष्य 5000, पर सिर्फ 200 के करीब ही कार्यरत।
- सुप्रीम कोर्ट (2019) ने राज्यों को अधिसूचना जारी कर न्यायालय शुरू करने का आदेश दिया।
- प्रत्येक अदालत में न्यायाधीश (Nyayadhikari) नियुक्त, राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय की सलाह से।
- अधिकार क्षेत्र: नागरिक व आपराधिक दोनों प्रकार के मामलों पर अधिकार।
- मोबाइल अदालतें, जो सीधे गाँवों में जाकर सुनवाई कर सकती हैं।
- सरल प्रक्रिया, साक्ष्य अधिनियम से बाध्य नहीं; प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों पर आधारित।
- अपील: आपराधिक मामलों में सत्र न्यायालय, नागरिक मामलों में जिला न्यायालय में छह माह में निपटान।
- न्याय तक समान पहुंच, तेज सुनवाई, और कम लागत सुनिश्चित करने का उद्देश्य।
- मुख्य बाधाएं: अधोसंरचना की कमी, जन-जागरूकता की कमी, कर्मियों की कमी, और राज्यस्तरीय समन्वय की दिक्कतें।





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