कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय और IBBI कंपनियों के लिए दिवालियापन पूर्व-चेतावनी प्रणाली पर विचार कर रहे हैं। यह प्रणाली भुगतान चूक से पहले वित्तीय संकट के संकेत पकड़ने और दिवालियापन रोकने के लिए बनाई जाएगी। प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद आया है और NCLT का बोझ घटाने का लक्ष्य रखता है।
BulletsIn
- आईबीसी सुधारों के तहत पूर्व-चेतावनी ढांचा विचाराधीन
- लक्ष्य: डिफॉल्ट से पहले संकट संकेत पकड़ना, दिवालियापन रोकना
- सुप्रीम कोर्ट के सुझाव से प्रेरित कदम
- वित्तीय अनुपात, सेक्टर चेतावनी, परियोजना देरी से संकेत मिलेंगे
- निदेशकों, ऑडिटरों को संकट रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी संभव
- पूर्व-दिवालियापन मध्यस्थता और पुनर्गठन प्लेटफॉर्म प्रस्तावित
- 2016 से अब तक 1,194 कंपनियां सुलझीं, ₹3.89 ट्रिलियन वसूली
- कई मामलों में 330 दिन की समयसीमा पार हुई
- कंपनी अधिनियम, IBC, SEBI, RBI, RERA में बदलाव संभव
- उद्देश्य: प्रतिक्रियात्मक प्रणाली से रोकथाम आधारित मॉडल की ओर बदलाव





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.