टोगो, इंडोनेशिया और मिस्र के मंत्रियों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रगति का माप वास्तविक सामाजिक लाभ और नागरिक जीवन सुधार से होना चाहिए।
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मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सफलता का मूल्यांकन बदले हुए जीवनों से होना चाहिए, न कि विशाल गणना संसाधनों या जटिल मॉडलों से।
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पैनल ने वैश्विक दक्षिण में उपयोग अंतर समाप्त करने हेतु स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन में लोकहित आधारित अनुप्रयोगों को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
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इंडोनेशिया ने लगभग अस्सी प्रतिशत इंटरनेट पहुंच विस्तार तथा दूरस्थ क्षेत्रों में तपेदिक पहचान के लिए बुद्धिमान निदान उपकरणों के उपयोग का उल्लेख किया।
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टोगो ने बताया कि अफ्रीका की नगण्य वैश्विक प्रतिभा हिस्सेदारी और आधारभूत ढांचे की कमी व्यापक प्रभाव विस्तार में प्रमुख बाधाएं हैं।
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महामारी अवधि में टोगो ने उपग्रह चित्रों और दूरसंचार आंकड़ों का उपयोग कर पात्र लाभार्थियों की सटीक पहचान कर लक्षित आर्थिक सहायता प्रदान की।
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मिस्र ने गुणवत्तापूर्ण चिकित्सीय जांच और डिजिटल शिक्षण सहायता को छोटे शहरों तथा वंचित समुदायों तक पहुंचाने के प्रयासों पर जोर दिया।
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निष्कर्ष में समावेशी संरचना, विश्वसनीय प्रणाली, संस्थागत क्षमता निर्माण और सहयोगात्मक विनियमन को न्यायसंगत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रगति हेतु अनिवार्य बताया गया।





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