भारतीय संविधान की पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन, संरक्षण और विकास के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान प्रदान करती है।
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• भारतीय संविधान की पाँचवीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़कर अन्य राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय समुदायों के प्रशासन से संबंधित है।
• अनुच्छेद दो सौ चवालीस के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाई गई है।
• अनुच्छेद दो सौ चवालीस की उपधारा एक के अनुसार भारत के राष्ट्रपति किसी क्षेत्र को आदेश जारी करके अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।
• अनुच्छेद तीन सौ उनतालीस केंद्र सरकार को अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण की निगरानी का अधिकार देता है।
• अनुसूचित क्षेत्रों में राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारी होती है और उन्हें इन क्षेत्रों के प्रशासन की रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजनी होती है।
• अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य में जनजातीय सलाहकार परिषद का गठन किया जाता है जिसमें कुल बीस सदस्य होते हैं।
• राज्यपाल को इन क्षेत्रों में लागू केंद्रीय या राज्य कानूनों में संशोधन करने तथा जनजातीय भूमि के हस्तांतरण को नियंत्रित करने का अधिकार होता है।
• वर्तमान में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में अनुसूचित क्षेत्र मौजूद हैं।





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