यूरोपीय आयोग ने यूरोप को अमेरिका और चीन के मुकाबले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 20 बिलियन डॉलर की चार AI गीगाफैक्ट्रियों की योजना बनाई है। इस परियोजना का सामना चिप की कमी, उपयुक्त स्थानों की तलाश और बिजली की आपूर्ति की समस्याओं से होगा।
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- यूरोपीय आयोग AI गीगाफैक्ट्रियों के लिए $20 बिलियन जुटाने की योजना बना रहा है।
- ये गीगाफैक्ट्रियां सार्वजनिक डेटा केंद्र के रूप में कार्य करेंगी, यूरोप में AI अनुसंधान और विकास में मदद करेंगी।
- इस परियोजना को चिप्स की कमी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति की समस्याओं का सामना करना होगा।
- उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में Google और Amazon जैसे बड़े क्लाउड सेवा प्रदाताओं की कमी को देखते हुए इस परियोजना की संभावना पर सवाल उठाए गए हैं।
- गीगाफैक्ट्रियां स्थानीय स्टार्टअप्स को AI मॉडल बनाने में मदद करेंगी, जो यूरोप के सख्त सुरक्षा और डेटा सुरक्षा नियमों के तहत होंगी।
- यह परियोजना यूरोप की 200 बिलियन यूरो की “InvestAI” योजना का हिस्सा है, जो यूरोप को AI में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखती है।
- यूरोपीय आयोग का मानना है कि गीगाफैक्ट्रियां सार्वजनिक-निजी साझेदारी के रूप में काम करेंगी, ताकि छोटे वैज्ञानिक और कंपनियां बड़े AI मॉडल बना सकें।
- गीगाफैक्ट्रियां प्रत्येक में 100,000 अत्याधुनिक चिप्स होंगी, जो जर्मनी के जुपिटर सुपरकंप्यूटर परियोजना से भी बड़ी होंगी।
- U.S. चिप निर्माता Nvidia के GPUs, जो AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए आवश्यक हैं, काफी महंगे होते हैं, जिनकी कीमत लगभग $40,000 प्रति यूनिट है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि चिप्स की आपूर्ति को लेकर U.S. सरकार के प्रतिबंध यूरोप की प्रगति में रुकावट डाल सकते





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