लैप्स का सिद्धांत 19वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा लागू किया गया। इसे मुख्य रूप से लॉर्ड डलहौज़ी (1848–1856) ने अपनाया। इस नीति के तहत, जिन रियासतों में प्राकृतिक पुरुष उत्तराधिकारी नहीं था, उन्हें कंपनी में मिला लिया जाता था। भारतीय उत्तराधिकार प्रथाओं की अनदेखी ने गहरा असंतोष पैदा किया और 1857 के विद्रोह का मार्ग प्रशस्त किया।
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- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की रियासतों हड़पने की नीति
- लॉर्ड डलहौज़ी के कार्यकाल (1848–1856) में व्यापक उपयोग
- नियम: प्राकृतिक पुरुष उत्तराधिकारी न होने पर राज्य हड़प
- दत्तक पुत्र की मान्यता ब्रिटिश स्वीकृति पर निर्भर
- सतारा (1848), झांसी (1853), नागपुर (1854) जैसे राज्य जोड़े गए
- कुप्रशासन व उत्तराधिकारी की कमी का हवाला देकर अधिग्रहण
- कंपनी को सालाना 40 लाख पाउंड अतिरिक्त राजस्व मिला
- शासकों, सैनिकों व जनता में गहरी नाराज़गी फैली
- रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहेब जैसे नेताओं ने विद्रोह का नेतृत्व किया
- 1858 में ब्रिटिश क्राउन के सीधे शासन के बाद नीति समाप्त





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