चंदेल वंश ने 9वीं से 14वीं शताब्दी तक बुंदेलखंड पर शासन किया और खजुराहो के भव्य मंदिरों तथा उत्कृष्ट स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध हुआ।
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- चंदेल वंश की स्थापना नन्नुक ने 831 ईस्वी में की थी और इसने वर्तमान मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र पर शासन किया।
- प्रारंभ में चंदेल गुर्जर-प्रतिहारों के सामंत थे, लेकिन बाद में खजुराहो, कालिंजर और महोबा को केंद्र बनाकर स्वतंत्र शक्ति के रूप में उभरे।
- यशोवर्मन ने कालिंजर दुर्ग पर अधिकार कर चंदेल स्वतंत्रता स्थापित की, जबकि धंग ने राज्य का विस्तार कर ग्वालियर पर नियंत्रण प्राप्त किया।
- विद्याधर ने महमूद गजनवी के आक्रमणों का सफलतापूर्वक सामना किया और उत्तर भारत में चंदेल शक्ति को मजबूत बनाया।
- चंदेल शासकों ने प्रसिद्ध खजुराहो स्थापत्य शैली का विकास किया, जो उत्कृष्ट मूर्तिकला, बलुआ पत्थर और पंचायतन शैली के लिए जानी जाती है।
- खजुराहो मंदिरों में गर्भगृह, मंडप, अर्धमंडप तथा अंतराल जैसी संरचनाएं मिलती हैं और उनकी दीवारें सुंदर शिल्पकला से अलंकृत हैं।
- लक्ष्मण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, कंदारिया महादेव मंदिर और पार्श्वनाथ मंदिर चंदेल स्थापत्य और कला के प्रमुख उदाहरण हैं।
- 13वीं शताब्दी में बाहरी आक्रमणों, राजनीतिक कमजोरी और दिल्ली सल्तनत के विस्तार के कारण चंदेल वंश का पतन शुरू हुआ।





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