कैलकोलिथिक युग (लगभग 2000–700 ईसा पूर्व) भारत के नवपाषाण और धातु युग के बीच का संक्रमणकाल था। इस दौर में पत्थर और तांबे दोनों के औजारों का उपयोग शुरू हुआ। कृषि पर आधारित ग्रामीण बस्तियाँ उभरीं, विविध सांस्कृतिक विशेषताएँ सामने आईं और विशिष्ट मिट्टी के बर्तन बनाए गए। परंतु, धातु तकनीक और स्वास्थ्य संबंधी सीमाएँ बनी रहीं।
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- पाषाण और धातु युग के बीच का संक्रमणकाल (2000–700 ई.पू.)
- पहली बार तांबे के औजारों का प्रयोग शुरू
- पहाड़ों-नदियों के पास कृषि आधारित बस्तियाँ; चावल, गेहूं, जौ की खेती
- प्रमुख संस्कृति: जर्वे, मालवा, आहड़-बाणास, कायथा, सावलदा
- विशिष्ट काले-लाल व गेरुए रंग के बर्तन; फूल-पशु चित्रांकन
- औजार: चाकू, कुल्हाड़ी, छेनी; आभूषणों में अगेट, जैस्पर, कार्नेलियन
- कताई-बुनाई में कुशल; मकान मिट्टी, चूना, गोबर से बने
- शव दफन: महाराष्ट्र में उत्तर-दक्षिण, दक्षिण भारत में पूर्व-पश्चिम
- बच्चों की मौत, कुपोषण, महामारी के प्रमाण
- सीमाएँ: लोहे के औजार नहीं, दूध का प्रयोग नहीं, मिश्रधातु ज्ञान कम





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