1950 में के एम पणिक्कर ने भारत की कूटनीतिक नीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब चीन, तिब्बत और कोरिया से जुड़े संकट उभर रहे थे।
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- के एम पणिक्कर चीन में भारत के राजदूत थे और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के दौरान कूटनीतिक दायित्व निभा रहे थे।
- चीन ने संकेत दिया था कि 38वीं समानांतर रेखा पार होने की स्थिति में वह कोरिया युद्ध में हस्तक्षेप कर सकता है।
- पणिक्कर ने चीन की रणनीतिक चिंताओं तथा क्षेत्रीय घटनाक्रमों की जानकारी नियमित रूप से नई दिल्ली तक पहुंचाई।
- अनेक पश्चिमी देशों ने उनके आकलनों पर संदेह व्यक्त किया और चीन संबंधी उनकी रिपोर्टों की आलोचना की।
- जवाहरलाल नेहरू ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए संतुलित विदेश नीति और संवाद आधारित दृष्टिकोण अपनाया।
- अक्टूबर 1950 में चीन के कोरिया युद्ध में प्रवेश ने पहले व्यक्त की गई कई आशंकाओं को सही सिद्ध किया।
- इसी अवधि में चीनी सेनाओं ने तिब्बत में आगे बढ़ते हुए क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित किया।
- इन घटनाओं के दौरान निभाई गई पणिक्कर की भूमिका आज भी भारत चीन संबंधों के अध्ययन में महत्वपूर्ण मानी जाती है।





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