1857 के विद्रोह के बाद भारत में ब्रिटिश प्रशासन में बड़ा बदलाव आया। 1858 के अधिनियम से सत्ता सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आई। उद्देश्य था शांति बनाए रखना, रियासतों से सहयोग करना और शासन में सुधार करना। यह प्रणाली तीन मुख्य स्तंभों—नागरिक सेवा, सेना और पुलिस—पर आधारित थी, साथ ही न्यायिक ढांचे और ‘कानून के शासन’ की अवधारणा पर।
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- 1857 विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त
- 1858 अधिनियम से रियासतों के अधिकार और सम्मान की गारंटी
- तीन स्तंभ: सिविल सेवा, सेना, पुलिस
- कॉर्नवालिस ने सिविल सेवा सुधार किए; 1853 से प्रतियोगी परीक्षा अनिवार्य
- सेना में सभी अधिकारी ब्रिटिश; विस्तार और नियंत्रण का साधन
- कॉर्नवालिस ने पुलिस प्रणाली बनाई; थाने और दरोगा नियुक्त
- न्यायिक ढांचा: दीवानी अदालतें, सर्किट कोर्ट, 1865 में उच्च न्यायालय
- ‘कानून का शासन’ शुरू, सबके लिए समानता की घोषणा
- यूरोपियनों के लिए अलग अदालतें; न्याय महंगा और देर से
- सुधार: भारतीय परिषद अधिनियम, मॉर्ले-मिंटो, मोंटेग-चेल्म्सफोर्ड, 1935 का अधिनियम
- लोक सेवा आयोग, जिला कलेक्टर, स्थानीय स्वशासन जैसे संस्थान आज भी जारी





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