ब्रिक्स देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र का विरोध करते हुए विकासशील देशों के लिए अधिक जलवायु वित्त की मांग की।
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- ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में संयुक्त वक्तव्य जारी कर यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र का विरोध किया।
- ब्रिक्स ने कार्बन सीमा समायोजन तंत्र को कार्बन मूल्य निर्धारण से जुड़ा एकतरफा व्यापार उपाय बताया, जो विकासशील देशों को प्रभावित कर सकता है।
- यूरोपीय संघ का यह तंत्र इस्पात, एल्युमिनियम, सीमेंट, उर्वरक और बिजली जैसे अधिक कार्बन उत्सर्जन वाले आयातित उत्पादों पर लागू होता है।
- कार्बन सीमा समायोजन तंत्र 1 जनवरी 2026 से अपने अंतिम चरण में पहुंच गया, जिसके तहत आयातकों को उत्सर्जन प्रमाणपत्र खरीदने होंगे।
- ब्रिक्स देशों ने विकासशील देशों के लिए अधिक जलवायु वित्त की मांग की और 2035 तक अनुकूलन वित्त को तीन गुना करने की अपील की।
- बैठक भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता में आयोजित हुई और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
- बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, मिस्र और इथियोपिया के प्रतिनिधि शामिल हुए।
- ब्रिक्स ने जलवायु अनुकूलन के लिए अनुदान और रियायती वित्त की जरूरत पर जोर दिया, जिसका उपयोग आपदा तैयारी और जल सुरक्षा में किया जा सकता है।





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