वैज्ञानिकों ने सूर्यप्रकाश आधारित ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो कठिन प्लास्टिक कचरे को हाइड्रोजन ईंधन और उपयोगी औद्योगिक रसायनों में बदल सकती है।
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- वैज्ञानिकों ने सूर्यप्रकाश आधारित प्रकाश-उत्प्रेरण प्रणाली विकसित की है, जो प्लास्टिक कचरे को स्वच्छ हाइड्रोजन ईंधन में बदल सकती है।
- यह प्रक्रिया पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे प्लास्टिक को हाइड्रोजन, संश्लेषित गैस, एसीटिक अम्ल और अन्य उपयोगी रसायनों में परिवर्तित करती है।
- कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ऐसा मजबूत प्रकाश-उत्प्रेरक तैयार किया, जो प्रयोगशाला परीक्षण में दो सौ साठ घंटे से अधिक समय तक सक्रिय रहा।
- इस प्रणाली में पुराने वाहन बैटरियों के अम्ल और प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर हाइड्रोजन ईंधन और रासायनिक उत्पाद बनाए गए।
- एडिलेड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी सूर्यप्रकाश आधारित विधि विकसित की, जिससे प्लास्टिक से हाइड्रोजन, संश्लेषित गैस और तरल ईंधन प्राप्त किया गया।
- एक धातु-मुक्त कार्बन उत्प्रेरक पर भी परीक्षण किया गया, जिसने अधिक सुरक्षित और टिकाऊ ईंधन उत्पादन की संभावनाएं दिखाईं।
- दुनिया में हर वर्ष चार सौ करोड़ टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है, लेकिन इसका बहुत कम हिस्सा ही पुनर्चक्रित हो पाता है।
- वैज्ञानिकों के अनुसार यह तकनीक कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलकर प्रदूषण कम कर सकती है और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।





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