भारतीय संविधान का अनुच्छेद 360 देश की वित्तीय स्थिरता, आर्थिक साख और राजकोषीय व्यवस्था पर गंभीर खतरा होने पर वित्तीय आपातकाल लागू करने की अनुमति देता है।
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- अनुच्छेद 360 राष्ट्रपति को वित्तीय आपातकाल घोषित करने का अधिकार देता है जब देश की आर्थिक स्थिरता या वित्तीय विश्वसनीयता गंभीर संकट में हो।
- वित्तीय आपातकाल संबंधी प्रावधान भारत शासन अधिनियम 1935 से लिए गए थे ताकि राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा की जा सके।
- वित्तीय आपातकाल की घोषणा को दो महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों से साधारण बहुमत द्वारा स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है।
- स्वीकृति मिलने के बाद वित्तीय आपातकाल अनिश्चितकाल तक जारी रह सकता है और इसके लिए बार-बार संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती।
- वित्तीय आपातकाल लागू होने पर केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय अनुशासन, व्यय नियंत्रण और आर्थिक प्रबंधन संबंधी निर्देश जारी कर सकती है।
- राष्ट्रपति को सरकारी कर्मचारियों सहित उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों में कटौती करने का अधिकार मिल जाता है।
- अनुच्छेद 360 के तहत राज्यों के धन विधेयकों और वित्तीय विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने का प्रावधान भी शामिल है।
- भारत में अब तक कभी वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया है, हालांकि 1991 में देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर चुका है।





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