संग्रह के पाँच दशक से अधिक समय बाद अपोलो अभियानों से लाई गई चंद्र चट्टानें चंद्रमा के रहस्यमय और परिवर्तनशील प्राचीन चुंबकीय क्षेत्र पर नए संकेत दे रही हैं।
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- अपोलो 11 और अपोलो 17 अभियानों के दौरान एकत्रित चंद्र चट्टानों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों को अरबों वर्ष पहले अत्यंत शक्तिशाली लेकिन अल्पकालिक चुंबकीय उछाल के प्रमाण मिले हैं।
- अनुसंधान से संकेत मिलता है कि चंद्रमा का चुंबकीय क्षेत्र सामान्यतः कमजोर था, किंतु तीन से चार अरब वर्ष पूर्व यह कुछ समय के लिए अत्यधिक तीव्र हो गया था।
- ये चुंबकीय उछाल संभवतः पाँच हजार वर्ष से भी कम समय तक रहे होंगे और कुछ मामलों में केवल कुछ दशकों तक सीमित रहे, जो भूवैज्ञानिक दृष्टि से बहुत ही संक्षिप्त अवधि है।
- ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि चट्टानों में संरक्षित प्रबल चुंबकीय संकेत उच्च टाइटेनियम स्तर से जुड़े थे, जो प्राचीन ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण बने।
- पूर्व के सिद्धांतों में माना जाता था कि चंद्रमा का चुंबकीय क्षेत्र लंबे समय तक मजबूत बना रहा, लेकिन नए विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि इसमें समय-समय पर उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव हुए।
- अपोलो मिशनों के नमूने मुख्यतः टाइटेनियम-समृद्ध ज्वालामुखीय मैदानों से प्राप्त किए गए थे, जो संभवतः चंद्रमा के संपूर्ण चुंबकीय इतिहास का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करते।
- भविष्य में नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के अंतर्गत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का अन्वेषण किया जाएगा, जहाँ प्राचीन चट्टानों और स्थायी छाया वाले गड्ढों से अधिक जानकारी मिल सकती है।
- चंद्रमा के प्राचीन चुंबकीय कवच के इतिहास को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुंबकीय क्षेत्र ग्रहों को हानिकारक ब्रह्मांडीय विकिरण से बचाने में सहायक होते हैं और जीवन की संभावनाओं को प्रभावित करते हैं।





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