विशेषज्ञों के अनुसार, सेफ हार्बर नियमों के विस्तार के बावजूद एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट जटिल और बड़े अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
BulletsIn
- Union Budget 2026 के बाद safe harbour नियमों का विस्तार किया गया
- 15.5% का समान मार्जिन और ₹2,000 करोड़ की उच्च पात्रता सीमा निर्धारित की गई
- Safe harbour एक सरल, कम लागत और स्वचालित अनुपालन व्यवस्था प्रदान करता है
- Transfer Pricing विवादों और मुकदमों को कम करता है
- इसके बावजूद Advance Pricing Agreements (APA) की प्रासंगिकता बनी रहेगी
- APA जटिल अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के लिए लचीले और अनुकूलित समाधान प्रदान करता है
- कई वर्षों के लिए कर (tax) में निश्चितता प्रदान करता है
- पुराने विवादों को भी कवर कर सकता है, जो safe harbour में संभव नहीं
- द्विपक्षीय APA (Bilateral APA) दोहरे कराधान (double taxation) से बचाता है
- बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए कर संबंधी स्पष्टता बढ़ाता है
- ₹2,000 करोड़ से अधिक के बड़े लेन-देन वाली कंपनियां APA को प्राथमिकता देती हैं
- सरकार ने दोनों व्यवस्थाओं के बीच बदलाव की सुविधा दी है
- इससे ease of doing business और compliance efficiency बढ़ती है
- विशेषज्ञों के अनुसार दोनों प्रणाली साथ-साथ चलेंगी
- Safe harbour छोटे और नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त है
- APA जटिल और उच्च-मूल्य लेन-देन के लिए आवश्यक रहेगा





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