Anglo-Maratha Wars 1775 से 1818 के बीच मराठा संघ और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच लड़े गए तीन प्रमुख युद्ध थे, जिनसे भारत में मराठा शक्ति का पतन और ब्रिटिश प्रभुत्व स्थापित हुआ।
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- आंग्ल-मराठा युद्ध 1775 से 1818 के बीच ब्रिटिश और मराठों के बीच लड़े गए।
- इन युद्धों से मराठा शक्ति कमजोर हुई और ब्रिटिश प्रभाव बढ़ा।
- मराठा संघ के भीतर उत्तराधिकार विवाद और आंतरिक संघर्ष बढ़ गए थे।
- ब्रिटिशों ने मराठा सरदारों के बीच मतभेदों का लाभ उठाया।
- मुख्य मराठा परिवारों में होल्कर, सिंधिया, भोंसले, गायकवाड़ और पेशवा शामिल थे।
- पहला आंग्ल-मराठा युद्ध माधवराव प्रथम की मृत्यु के बाद शुरू हुआ।
- Treaty of Surat रघुनाथराव और ब्रिटिशों के बीच हुआ।
- मराठों ने वडगांव में ब्रिटिश सेना को पराजित किया।
- पहला युद्ध Treaty of Salbai के साथ समाप्त हुआ।
- दूसरा आंग्ल-मराठा युद्ध Treaty of Bassein के बाद शुरू हुआ।
- इस संधि से पेशवा ब्रिटिश संरक्षण पर निर्भर हो गया।
- ब्रिटिशों ने सिंधिया और भोंसले की सेनाओं को पराजित किया।
- तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध पिंडारियों और ब्रिटिश हस्तक्षेप के कारण शुरू हुआ।
- मुख्य युद्ध खड़की, सीताबुल्दी और महिदपुर में हुए।
- 1818 में मराठों की निर्णायक हार हुई और पेशवाशाही समाप्त कर दी गई।
- युद्धों के बाद भारत के अधिकांश हिस्सों पर ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित हो गया।
- मराठा सरदारों और क्षेत्रीय शक्तियों का प्रभाव कमजोर पड़ गया।
- इन युद्धों ने भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को मजबूत किया।





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