सविनय अवज्ञा आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनआंदोलन को नई दिशा दी और पूर्ण स्वतंत्रता के लक्ष्य को राष्ट्रीय संघर्ष के केंद्र में रखा।
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- सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत 1930 में Mahatma Gandhi के नेतृत्व में ब्रिटिश औपनिवेशिक कानूनों और आर्थिक शोषण के विरोध में की गई।
- इसके प्रमुख कारणों में डोमिनियन स्टेटस की अस्वीकृति, नेहरू रिपोर्ट पर ब्रिटिश उदासीनता और पूर्ण स्वराज की बढ़ती मांग शामिल थीं।
- आंदोलन की औपचारिक शुरुआत 6 अप्रैल 1930 को दांडी मार्च के बाद गांधी द्वारा नमक कानून तोड़ने से हुई।
- नमक को प्रतीकात्मक मुद्दा इसलिए चुना गया क्योंकि यह आम जनता से जुड़ा था और ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण एकाधिकार को दर्शाता था।
- आंदोलन के स्वरूप में नमक कानून उल्लंघन, कर न देना, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, शराब दुकानों की पिकेटिंग और अदालतों का बहिष्कार शामिल था।
- इसमें किसानों, महिलाओं, छात्रों और शहरी मध्यम वर्ग की व्यापक भागीदारी रही, जिससे यह एक सच्चा जनआंदोलन बना।
- आंदोलन की सीमाओं में असमान भागीदारी, दमनकारी गिरफ्तारियां, औद्योगिक मजदूरों की सीमित भूमिका और अंततः समझौते के बाद स्थगन शामिल रहे।
- इसके प्रभावस्वरूप भारत का स्वतंत्रता संघर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ और पूर्ण स्वराज राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में स्थापित हुआ।





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