मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान समाप्त होने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति और नागरिक अधिकार प्रभावित होंगे।
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शिमला में कैबिनेट बैठक और वित्त विभाग की प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी समाप्त करना केवल सरकार नहीं, जनता के अधिकारों का विषय है।
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उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान हटने से राज्य सरकार के लिए नागरिकों के वैध अधिकारों और कल्याण की रक्षा करना कठिन हो जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि आरडीजी 17 राज्यों के लिए बंद किया गया है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
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उन्होंने उल्लेख किया कि राज्य के कुल बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता है, जिससे हिमाचल देश का दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर समाधान के लिए प्रधानमंत्री से भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ मुलाकात करने को तैयार है।
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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वार्ता से समाधान नहीं निकला तो राज्य सरकार इस निर्णय के खिलाफ न्यायालय का रुख करेगी।





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