सरकारी संरक्षण प्रयासों और सतत पर्यटन नीतियों के चलते कश्मीर की आर्द्रभूमियाँ प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित शीतकालीन आश्रय बन रही हैं।
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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आर्द्रभूमि संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रयास तेज किए हैं।
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सर्दियों में साइबेरिया, रूस, चीन, उत्तरी यूरोप और मध्य एशिया से हजारों प्रवासी पक्षी कश्मीर पहुंचते हैं।
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होकर्सर, हाइगाम, पंपोर और बांदीपोरा जैसे आर्द्र क्षेत्र जैव विविधता के प्रमुख केंद्र बने हैं।
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प्रवासी पक्षी अक्टूबर से आना शुरू करते हैं, फरवरी में संख्या चरम पर होती है और मार्च तक घाटी में रहते हैं।
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वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार हर मौसम में लगभग दो लाख पक्षी कश्मीर की आर्द्रभूमियों में आते हैं।
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प्रशासन जल स्तर प्रबंधन, अतिरिक्त आहार, अवैध शिकार रोकथाम और नियमित निगरानी जैसे उपाय लागू करता है।
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होकर्सर आर्द्रभूमि सबसे अधिक प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती है और प्रमुख शीतकालीन आश्रय स्थल है।
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जागरूकता कार्यक्रम, छात्रों के भ्रमण और वार्षिक पक्षी गणना संरक्षण प्रयासों और प्रकृति पर्यटन को मजबूत करते हैं।





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