महिला आरक्षण विधेयक विधायिकाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर भारतीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता को सशक्त बनाने का प्रयास है।
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महिला आरक्षण विधेयक, आधिकारिक रूप से संविधान (128वां संशोधन) अधिनियम 2023, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है।
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यह विधेयक सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया और नए संसद भवन में पारित होने वाला पहला कानून बना।
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महिलाओं को आरक्षण का लाभ अगले परिसीमन के बाद मिलेगा, जो जनगणना आंकड़ों से जुड़ा है और 2026 के बाद किया जाएगा।
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मौजूदा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
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यह आरक्षण घूर्णन प्रणाली पर आधारित होगा और इसके लागू होने की तिथि से 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
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विधेयक में राज्यसभा और विधान परिषदों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया है, जिसकी आलोचना हुई है।
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समर्थकों के अनुसार यह कानून महिलाओं के नेतृत्व, राजनीतिक भागीदारी और लिंग-संवेदनशील नीति निर्माण को सुदृढ़ करेगा।
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आलोचक इसके विलंबित क्रियान्वयन, प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व और सामाजिक विविधता के सीमित समावेश पर चिंता जताते हैं।





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