वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि एफ एंड ओ पर बढ़ाई गई एसटीटी का उद्देश्य अत्यधिक सट्टेबाज़ी रोकना और खुदरा निवेशकों के नुकसान कम करना है।
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वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वायदा और विकल्प कारोबार पर एसटीटी बढ़ोतरी का उद्देश्य बाजार में बढ़ती सट्टेबाज़ी को हतोत्साहित करना है।
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उन्होंने बताया कि कई अभिभावकों ने शिकायत की कि उनके बच्चे डेरिवेटिव ट्रेडिंग में लगातार भारी वित्तीय नुकसान उठा रहे हैं।
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सीतारमण ने एफ एंड ओ बाजार को अत्यधिक जोखिमपूर्ण बताया, जहां अधिक लीवरेज के कारण खुदरा निवेशकों को नुकसान की संभावना ज्यादा रहती है।
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सेबी के अध्ययन के अनुसार 90–93 प्रतिशत व्यक्तिगत एफ एंड ओ निवेशक नुकसान झेलते हैं, बावजूद इसके वे ट्रेडिंग जारी रखते हैं।
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पिछले अध्ययनों में यह भी सामने आया कि 75 प्रतिशत से अधिक घाटे में रहने वाले निवेशक बार-बार ट्रेड करके नुकसान बढ़ाते हैं।
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बजट 2026–27 में फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.05 प्रतिशत किया गया, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज़ पर मामूली बढ़ोतरी प्रस्तावित है।
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सरकार के अनुसार डेरिवेटिव ट्रेडिंग का कुल वॉल्यूम देश की जीडीपी से 500 गुना अधिक है, जो सट्टा प्रवृत्ति को दर्शाता है।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि यह कदम राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि घरेलू बचत की सुरक्षा और प्रणालीगत जोखिम घटाने के लिए उठाया गया है।





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