1822 में महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में रामोसी जनजातियों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह किया। यह विरोध तब शुरू हुआ जब मराठा क्षेत्रों के ब्रिटिश अधिग्रहण के बाद उनकी आजीविका छिन गई। विद्रोह कई वर्षों तक जारी रहा और ब्रिटिशों ने इसे दबाने के साथ समझौता भी किया।
- 1822 में रामोसी विद्रोह पश्चिमी घाट के सतारा क्षेत्र में शुरू हुआ।
- मराठा क्षेत्रों के 1818 में ब्रिटिश कब्जे से रोजगार खोया गया।
- चित्तूर सिंह और बाद में उमाजी नाइक जैसे नेता रहे।
- भारी कर और आर्थिक कठिनाई ने असंतोष बढ़ाया।
- विद्रोही ब्रिटिश-नियंत्रित इलाकों पर हमले और लूटपाट करते रहे।
- 1825–29 तक विद्रोह की गतिविधियां चलीं।
- ब्रिटिश शक्ति और वार्ता से व्यवस्था बहाल हुई।
- कुछ रामोसियों को पहाड़ी पुलिस में भर्ती किया गया।
- यह विद्रोह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनजातीय प्रतिरोध दर्शाता है।





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