16वीं से 18वीं शताब्दी के इंग्लैंड में समय बताना आज की तरह सटीक नहीं था। चर्च अदालतों के अभिलेख बताते हैं कि लोग तारीख़ और समय को स्थानीय, धार्मिक और कृषि गतिविधियों के ज़रिए समझते और समझाते थे।
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समय अक्सर धार्मिक पर्व, मेले, फसल, भोजन समय से बताया जाता था।
चर्च अदालतें अनुमानित समय को भी स्वीकार करती थीं।
गवाह घड़ी के समय को माइकलमस, व्हिटसन, लेंट मेले से जोड़ते थे।
कृषि चक्र—कटाई, बोआई—महत्वपूर्ण समय संकेतक।
“कटाई” का अर्थ क्षेत्र और फसल के अनुसार बदलता था।
स्थानीय जानकारी के बिना कई संदर्भ अर्थहीन हो जाते थे।
गृहयुद्ध जैसी घटनाएँ समय निर्धारण का आधार बनती थीं।
क्वार्टर डेज़, राज्याभिषेक जैसे राष्ट्रीय संकेत व्यापक रूप से समझे जाते थे।
जूलियन और ग्रेगोरियन कैलेंडर के कारण तारीख़ों में अंतर।
1550–1800 में मानक समय उपयोग 27% बढ़ा, फिर भी अनौपचारिक तरीका जारी रहा।





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