राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) दक्षिणी पीठ द्वारा आयोजित दो-दिवसीय पर्यावरण क्षेत्रीय सम्मेलन-2025 चेन्नई में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अंतिम दिन मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, प्लास्टिक प्रदूषण, जलवायु संकट और प्रभावी पर्यावरण विनियमन पर विमर्श हुआ।
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- सम्मेलन का नेतृत्व NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने किया; आयोजन स्थल — कलैवनार आरंगम, चेन्नई।
- दूसरे दिन की शुरुआत तटीय सुरक्षा सत्र से, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने की।
- भारत की 11,098 किमी तटरेखा प्रदूषण से गंभीर खतरे में; हर साल 11–12 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्र में जाता है।
- आवास क्षरण से 405 वैश्विक “डेड ज़ोन”; 3 अरब लोग महासागर पर निर्भर, 20% वैश्विक प्रोटीन मछलियों से।
- प्रवाल भित्तियाँ और मैंग्रोव जैव विविधता व जीविकोपार्जन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण; मानवीय गतिविधियों से क्षति।
- केरल सहित तटीय राज्यों में कटाव, कचरा प्रबंधन समस्या; 2020 तक 2,700+ उल्लंघन दर्ज।
- NCSCM की Sediment Cell अवधारणा—तलछट गतिशीलता के आधार पर तटों का वर्गीकरण।
- 1992–2022 के तट परिवर्तन: 34% क्षरण, 26.9% वृद्धि।
- जलवायु अनुमान: 2030 तक तापमान 1.1–2°C; 2080 तक 3.3–4.8°C बढ़ने की संभावना।
- विशेषज्ञों ने समुद्री घास, मैंग्रोव संरक्षण पर ज़ोर; मडफ़्लैट्स, लैगून, मत्स्य पालन को हो रहे नुकसान की चेतावनी।
- समापन सत्र में सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश आर. महादेवन का संदेश — उद्योगों की पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी पर बल।
- उद्धृत श्लोक: “न्याय से पृथ्वी की रक्षा, नियम से जीवन का संरक्षण; मिलकर हरित पर्यावरण को बनाए रखें।”





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