रिया सिन्हा के पेपर में बताया गया है कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया—बिलेटरल और क्वाड दोनों तरीकों से—बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बंदरगाह विकास और कनेक्टिविटी को कैसे आकार दे रहे हैं। बढ़ते वैश्विक व्यापार और चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच, क्षेत्र के बंदरगाह अभी भी आधुनिक मांगों से पीछे हैं।
BulletsIn
• BoB में वैश्विक व्यापार का ~30% हैंडल; पर बंदरगाह पिछड़े
• मुख्य चुनौतियाँ: इंफ्रास्ट्रक्चर कमी, अलग-अलग गवर्नेंस, कम डिजिटाइजेशन
• भारत घरेलू और पड़ोसी बंदरगाहों में निवेश बढ़ा रहा है
• 2021 से क्वाड ने बंदरगाहों को “स्ट्रैटेजिक इंफ्रा” माना
• क्वाड फोकस: ग्रीन शिपिंग, स्मार्ट पोर्ट, रेज़िलिएंट कनेक्टिविटी
• साझेदारों की ताकतें: जापान फाइनेंस, अमेरिका टेक, ऑस्ट्रेलिया क्षमता, भारत लोकेशन
• भारत क्वाड का उपयोग चीन के प्रभाव को संतुलित करने में कर रहा
• पेपर में भारत–क्वाड सहयोग के 3 मॉडल बताए
• मॉडल 1: द्विपक्षीय → नियंत्रण ज़्यादा, संसाधन सीमित
• मॉडल 2: हाइब्रिड → टेक लाभ, पर समन्वय जटिल
• मॉडल 3: पूर्ण क्वाड एकीकरण → तेज़ विकास, पर स्वायत्तता कम
• भारत को भू-राजनीति और विकास दोनों का संतुलन साधना होगा





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